सर्वोच्च अदालत के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारीख जी ने ली नर्मदा घाटी की मुलाकात।

 

डूब क्षेत्र के हर प्रभावित को संपूर्ण न्याय दिलाने तक साथ देने का आश्वासन।

बडवानी | २६ मार्च: नई दिल्ली पधारकर, नर्मदा घाटी के सरदार सरोवर व अन्य बांधों के विस्थापितों की कानूनी लडाई लडते आये अधिवक्ता संजय पारीख जी ने धार और बडवानी तथा खरगोन जिले के सैकडो गावों के हजारो प्रभावित परिवारों से मुलाकात की।

फरवरी 8, 2017 के रोज सर्वोच्च अदालत ने दिये विस्थापितों के पुनर्वास संबंधित दिये फैसले के बाद पधारे अधिवक्ता संजय जी का जोरदार स्वागत घाटी के हजारों किसान, मजदूर, मछुआरे, कुम्हार, व्यापारीयों ने भी किया। 25 मार्च की रात 10 बजे से मध्यरात्रतक निसरपुर जैसे बडे गाव में करीबन् दो हजार बहनों भाईयों ने वकील साहअ का सम्मान किया। हीरालाल भाई, धुरजी भाई, मुकेश भाई और मंगती बहन ने निसरपुर की हकीकत बया की।

2012-2013 में ही आधा डूब चुका निसरपुर के अब सैकडों परिवारों को ‘‘ डूब के बाहर ‘‘ घोषित करना तथा 600 एकड गांव के ही किसानों की जमीन जबरन् पुनर्वास स्थल के लिए अधिग्रहित करके कईयों को भूमीहीन बनाना पुनर्वास स्थल पर करोडो रूपये खर्चकर भी 30 कि.मी. के रास्ते कम से कम गुणवत्ता के निर्माण करना, गरीब, भूमीहीनों को आज तक दूसरी आजीविका या सही नुकसान भरपाई न देना….. आदि समस्याओं से संजय जी उभरू किया।

चिखल्दा में सैकडो लोगों ने संजय पारीख जी का राघाट से सुनिल केवट की नाव में से नर्मदा तट पधारते ही झंडे बैनर साथ महिला बच्चे,सभी गाववासीयों के द्वाररा रैली द्वारा स्वागत और साफा बांधकर सम्मान भी किया। मछुआरे, केवट, कारीगरों ने पारीख जी से कहा कि हम जीएंगे कैसे? हमें भी चाहिये वैकल्पिक आजीविका की निश्चिती।

अधिवक्ता संजय पारीख जी अपने वक्तव्यों में, उनकी तमाम लडाइयों, जैसे ओरिसा की निसमगिरि के संघर्ष, गंगा-यमुना के संघर्ष में आज तक उनकी हासिली की जानकारी देकर कहा कि सर्वोच्च अदालत का फैसला कई बाबतों में लाभदायी बताया, लेकिन यह भी कहा कि उसमें भी प्रभावितों को पुनर्वास स्थ्ज्ञल की तमाम सुविधाओं को सुनिश्चित करने का अधिकार विस्थापितों को मिलने के लिए प्रक्रिया जरूरी है।

पारीखजी ने कहा कि 31 सालों से संघर्ष करने वालों की यह जीत है और जिन्हें पूर्ण न्याय नहीं मिला है, उनकी लडाई भी आंदोलन के अनुभव और सही विकास के नजरिये के साथ न्यायपालिका के अंदर लडने के लिए मेरे जैसे अधिवक्ता सम्मान जनक मानते हुए, हरदम तैयार है।

पारीख जी ने कहा किसान फैसले के अनुसार शपथ पत्र जरूर दे किन्तु उसमें भी अपने बुनियादी संवैधनिक अधिकारों की वंचना न होने दे। आंदोलन के अधिवक्ता इसे सही तरीके से आगे बढाने में मदद करेंगे।

मछुआरों के, केवटो के, घर का कम मुआवजा मिला है, या जमीन के बदले नगद एस.आर.पी. की दूसरी किश्त दबाव-प्रभाव में लिए किसानों के भी जो अधिकार पुनर्वास नीति में है, उन्हें अमल में लाने से राज्य शासन क्यों हिचकिचाती है? उन्होने खुद होकर ये कार्य करने चाहिए। आजतक सर्वोच्च अदालत में इन सभी मुददों पर अडगे डाले ‘‘ 0 ‘‘ बैलेन्स बताया, वह मार्ग अ छोड देना चाहिये।

मेधा पाटकर ने बताया कि संजय पारीख जी ने  गंगा, यमुना की कानूनी पैरवी की है, चुनाव सुधार तक कई याचिकाओं में आम लोगों को राहत पर्यावरण दी है। अब गंगा, युमना जैसे नर्मदा को भी ‘‘ इन्सान ‘‘ रूपी क्यों नहीं माना जाए? म.प्र. शासन नर्मदा सेवा यात्रा मे करोडों रू. खर्च करने के बबदले नर्मदा की घाटी की प्रकृति, संस्कृति और विस्थापितों बचाने में सही भुमिका लेगी तो ही जनविरोधी राजनीति से छुटकारा होगा। अन्यथा आंदोलन तो लडकर अपना हक ले ही लेगा।

देवराम कनेरा  राहुल यादव   भागीरथ धनगर  श्यमा बहन  सीताराम अवास्या

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