जर्नलिज्म के कुछ सिद्धांत डिजिटल में लागू नहीं होते: कली पुरी, इंडिया टुडे ग्रुप

इंडिया टुडे ग्रुप’ (India Today Group) ने मोबाइल जर्नलिज्‍म (MOJO) की दुनिया में धूम मचाने के लिए सात प्रमुख डिजिटल चैनलों की श्रृंखला लॉन्‍च की है। इन सभी चैनलों को ‘Mobiletak.in’ पोर्टफोलियो के तहत लॉन्‍च किया गया हैं। इन चैनलों में ‘NEWS TAK’, ‘SPORTS TAK’, ‘FOOD TAK’, ‘LIFE TAK’, ‘ASTRO TAK’, ‘TECH TAK’ व ‘YOGA TAK’ शामिल हैं।

दरअसल, ‘MobileTak.in’ ऐसा प्‍लेटफॉर्म चैनल है जहां पर जाकर लोग देश दुनिया के बारे में बहुत कुछ जान सकते हैं। जैसे- आजकल क्‍या ट्रेंड में है और दुनिया में क्‍या खास हो रहा है।

Monday, 30 October, 2017

 रुहैल अमीन ।।

‘इंडिया टुडे समूह’ (ITG) में ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर (ब्रॉडकास्ट एंड न्यू मीडिया) कली पुरी की जिम्मेदारी बढ़ाकर हाल ही में उन्‍हें समूह का वाइस चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। नई जिम्‍मेदारी संभालने के साथ ही अब कली पुरी ‘आज तक’ (Aaj Tak) और ‘इंडिया टुडे’ (India Today) ब्रैंड को डिजिटल की दुनिया में नई पहचान देने में जुट गई हैं।

इसके लिए तमाम तरह की कवायद की जा रही है। सात नए मोबाइल चैनलों की लॉन्चिंग से इस परिवर्तन की शुरुआत भी हो गई है। कली पुरी का मानना है कि आज के समय में नई-नई तकनीक मीडिया घरानों के लिए प्रासंगिक बने रहने के लिए आकर्षक अवसर बन गई हैं। उनका मानना है कि ‘इंडिया टुडे ग्रुप’ इस बदलाव का नेतृत्‍व कर रहा है।

एक बातचीत के दौरान कली पुरी ने मोबाइल जर्नलिज्‍म की प्रासंगिता के साथ ही सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म्‍स से मिल रही टक्‍कर और फर्जी न्‍यूज (fake news) समेत ‘इंडिया टुडे ग्रुप’ के लिए अपने विजन के बारे में काफी विस्‍तार से जानकारी दी। प्रस्‍तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:

‘मोबाइल जर्नलिज्‍म’ (Mojo) प्‍लेटफॉर्म तैयार करने के लिए निवेश करने और इस समय सात नए मोबाइल चैनल लॉन्‍च करने के लिए आपको किसने प्रेरित किया ?

आजकल स्‍मार्टफोन का जमाना है। इन दिनों अधिकांश लोग ऐंटरटेनमेंट और इंनफोर्मेशन के लिए स्‍मार्टफोन का ही इस्‍तेमाल ज्‍यादा कर रहे हैं। मेरा मानना है कि इस प्‍लेटफॉर्म के लिए कंटेंट तैयार न करना  ठीक नहीं है।

मीडिया के क्षेत्र में होने के नाते हमें अहसास हुआ कि यह आज के समय की जरूरत थी और हमें ये भी लगा कि लाखों लोग कंटेंट से जुड़ रहे हैं लेकिन उनकी पहली पसंद फोन प्‍लेटफॉर्म है। इसलिए हमारे लिए यह भी जरूरी था कि यदि हम इन ऑडियंस को अपने साथ बनाए रखना चाहते हैं तो हमें उनके पसंदीदा प्‍लेटफार्म पर जाकर उनसे जुड़ना होगा।

मीडिया की बात करें तो कई पारंपरिक माध्‍यम आज भी लोगों के लिए प्रासंगिक बने हुए है। ऐसे में क्‍या आपको लगता है कि भारतीय मार्केट मोबाइल जर्नलिज्‍म को अपनाने लायक परिपक्‍व हो गया है ?

मोबाइल जर्नलिज्‍म को लेकर मैं बहुत उत्‍साहित हूं। हमने अपने चैनलों में से एक चैनल ‘दिल्‍ली आज तक’ को पूरी तरह मोजो बनाने के लिए प्रयास किया था। हालांकि इसमें हमें सबसे बड़ी इस चुनौती का सामना करना पड़ रहा है कि जब भी आप 45 मिनट के लिए लाइव होने का प्रयास करते हैं तो फोन काफी गर्म हो जाता है। इसमें बस यही सबसे बड़ी समस्‍या आ रही है। मुझे लगता है कि आने वाले समय में जो फोन आएंगे वे इससे बेहतर होंगे और हमें उस पर ज्‍यादा काम करने का मौका मिलेगा।

नई-नई डिवाइसें और टेक्‍नोलॉजी आने के बाद क्‍या न्‍यूज प्राप्‍त करने के तरीकों में कोई खास बदलाव दिखाई दिया है ?

आपकी बात सही है। इन दिनों जर्नलिज्‍म को देखने का तरीका पूरी तरह बदल रहा है। यह ऐसा नहीं है, जैसा हमने शुरुआत में अंदाजा लगाया था। जर्नलिज्‍म के कुछ सिद्धांत अथवा रूल्‍स  डिजिटल में अप्‍लाई नहीं होते हैं। लोग आपसे काफी कैजुअल होने की अपेक्षा रखते हैं। वे अपेक्षा करते हैं कि आप उनसे ज्‍यादा जुड़ेंगे और ज्‍यादा औपचारिक नहीं होंगे। मैं भी मानती हूं कि वे उम्‍मीद करते हैं कि चीजें सच्‍ची होंगी और उनमें ज्‍यादा बनावट नहीं होगी। इसके अलावा लोग यह भी अपेक्षा रखते हैं कि आप उन्‍हें तेजी से चीजों को ज्‍यों का त्‍यों दिखाएं।

सोशल मीडिया विभिन्‍न प्‍लेटफॉर्म्‍स को न्‍यूज उपलब्‍ध करा रही है । ऐसे में स्‍वतंत्र प्रकाशक किस प्रकार इसका लाभ उठा रहे हैं ?

यह सही है कि सोशल मीडिया पर न्‍यूज की खोज की जाती है लेकिन उसे किसी न किसी के द्वारा वहां पर डाला जाता है। ऐसा नहीं है कि सोशल मीडिया खुद कोई न्‍यूज तैयार कर रही है। ज्‍यादातर ऐसा होता नहीं है कि सोशल मीडिया हैंडल्‍स पर आई एसी न्‍यूज जिसकी पुष्टि नहीं हुई हो उसे दोबारा से मुख्‍य न्‍यूज वेबसाइट्स पर चेक करने के लिए भेजा जाता हो कि क्‍या यह सही है। मुझे लगता है कि सोशल मीडिया आपकी जर्नलिज्‍म में एक और एलीमेंट जोड़ देता है और ऐसा प्‍लेटफॉर्म तैयार हो जाता है, जिसे आप इस्‍तेमाल कर सकते हैं। मुझे यह भी लगता है कि सोशल मीडिया ने हमें काफी सिखाया है और बदले में उसे भी बहुत कुछ सीखने को मिला है।

‘फेसबुक’ को भी यह समझ आ गया है कि वे गणित (algorithms) पर न्‍यूजरूम नहीं चला सकते हैं और उन्‍हें एडिटर्स की भर्ती करनी पड़ी। हमने चुनाव के दौरान उनके साथ काम किया था और तब उन्‍हें महसूस हुआ कि वे कितनी सारी चीजों के बारे में नहीं जानते थे।

मुझे लगता है कि हम लोग एंगेजमेंट लेवल को जानने के लिए डाटा पर बहुत भरोसा करते हैं। यह तो सिर्फ उन ‘algorithms’ पर काम करने के बारे में है जिससे चीजें अच्‍छी हो सकें और हमने इस पर काम कर काफी कुछ सीख लिया है। हम फेसबुक के बीटा पार्टनर्स में से एक हैं और समय के साथ हमने उनके प्लेटफार्म पर काम करने के बारे में बहुत कुछ सीख लिया है।

 मीडिया में डाटा का इस्‍तेमाल किस तरह किया जाता है ?

डाटा से हमें कई तरह की जानकारी मिल जाती है। जैसे कि लोग क्‍या पढ़ अथवा देख रहे हैं और उनकी संख्‍या कितनी है। इसके अलावा वेबसाइट पर कितने पेज व्‍यूज हैं। इसके द्वारा ऐडवर्टाइजर्स भी काफी प्रभावित होते हैं और इन डाटा के आधार पर निर्णय लेते हैं। हमारा काम ये सुनिश्चित करना है कि हम डाटा का इस्‍तेमाल एक इंडिकेटर के रूप में करें लेकिन उस पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। इसके साथ ही यह भी बहुत जरूरी है कि हम इसके लिए अपनी तरफ से भी कोई व्‍यवस्‍था अपनाएं।

 न्यूज में तेजी (need for speed) और न्‍यूज की क्रेडिबिलिटी पर काफी बहस हो चुकी है। आप अपने न्‍यूजरूम में इन दोनों में कैसे तालमेल बिठा रही हैं ?

हम बहुत ही पत्रकारितावादी संस्‍थान हैं और हम अपनी पत्रकारिता को काफी गंभीरता से लेते हैं। पत्रकारिता को मुक्‍त ओर निष्‍पक्ष रहने की जरूरत है। हमारे संस्‍थान में प्रत्‍येक न्‍यूज एसाइनमेंट डेस्‍क के हाथ में होती है। प्रसारण से पूर्व एसाइनमेंट डेस्‍क इस न्‍यूज की काफी जांच पड़ताल करती है। एक बार उस खबर की पुष्टि हो जाने के बाद ही हम उसे प्रसारित करते हैं। यहां तक कि हमारी डिजिटल साइट पर भी कोई भी न्‍यूज बिना असाइनमेंट डेस्‍क से पास हुए नहीं लगती है। हमारे लिए स्‍पीड से ज्‍यादा क्रेडिबिलिटी म‍हत्‍वपूर्ण है। आज के समाचार जगत में यह बहुत जरूरी है कि आप सही न्‍यूज दिखाएं और आपकी क्रेडिबिलिटी बनी रहे।

आपको ‘इंडिया टुडे’ ग्रुप का नया वाइस चेयरपर्सन बनाया गया है। ऐसे में आपकी प्राथमिकताएं क्‍या हैं ?  

मेरी सबसे पहली प्राथमिकता ये सुनिश्चित करना है कि हमें जो भी नई संभावनाएं और नए अवसर मिल रहे हैं, हम उन सभी को अपनाने के लिए तैयार हैं। मुझे लगता है कि हम चीजों को एक जगह एकत्रित करने की प्रक्रिया को पूरा कर चुके हैं और अब हम स्थिर जगह पर हैं। यहां से हम आगे के लिए छलांग लगा सकते हैं। सात नए डिजिटल चैनलों की लॉन्चिंग इस दिशा में उठाया गया पहला कदम है। हम ‘आज तक’ और ‘इंडिया टुडे’ ब्रैंड को डिजिटल की ओर ले जा रहे हैं।

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