कठपुतली कॉलोनी, दिल्ली हाई कोर्ट ने अलग से याचिका के लिए सुझाया।

 

कठपुतली कॉलोनी के हजारों परिवारों ने रहेजा बिल्डर के प्लान को नकारा, सभी 4000 परिवारों के लिए वहीं घर बनाने के प्लान पर दी अपनी सहमति।
 
800 से ज्यादा परिवारों ने हस्ताक्षर कर कोर्ट में किया दाखिल, दिल्ली हाई कोर्ट ने अलग से याचिका के लिए सुझाया।
 
डीडीए पर हाई कोर्ट के रोक के आदेश के उल्लंघन के लगे गंभीर आरोप, डीडीए नहीं दे पायी जवाब।
 
कठपुतली कॉलोनी के साथ ट्रांजिट कैंप और नरेला जायेगी हाई कोर्ट द्वारा निर्मित दो सदस्यी स्वतंत्र टीम, जांचेंगे बचे घरों को और ट्रांजिट कैंप व नरेला में नागरिक सुविधाओं को।
 
हाई कोर्ट ने डीडीए को लगायी फटकार, हर पात्र परिवारों को न्याय का दिया आश्वासन।
कठपुतली कॉलोनी, नई दिल्ली | 5 दिसम्बर, 2017: आज कठपुतली कॉलोनी के लोगों ने दिल्ली उच्च न्यायालय में आकर अपने आवास के अधिकार की गुहार लगाते हुए रहेजा बिल्डर और डी.डी.ए. के बीच हुए समझौते को नकारने की बात रखी। करीब 800 से ज्यादा परिवारों ने हस्ताक्षर के रूप में रहेजा बिल्डर्स का विरोध जताते हुए, कठपुतली कॉलोनी की ज़मीन का एक छोटा सा टुकड़ा भी किसी बिल्डर को न देते हुए, रहेजा बिल्डर को हटाकर पूरी ज़मीन पर अपने घर बनाने का प्रस्ताव रखा। 2009 में जबसे रहेजा बिल्डर्स ने डी.डी.ए के साथ  कठपुतली कॉलोनी के लोगों का पुनर्वास करने का प्लान तय किया, ना तो लोगों को इसकी पूरी तरह जानकारी दी और बाद में जो सर्वे भी किया गया, उसमें कई पात्र परिवारों को छोड़ दिया गया। कई बार पुलिस बल द्वारा डरा-धमका कर घर खाली करवाने की कोशिश की गयी, तो कभी आंसू गैस और कभी लाठियों के दम पर लोगों की आवाज़ को दबाते हुए उन्हें जबरन कठपुतली कॉलोनी से बेघर करने की पूरी कवायद जारी रही। अविश्वास और बेघर होने के डर के कारण ही कठपुतली कॉलोनी के लोगों ने रहेजा को हटाने का प्रस्ताव रखने का निर्णय लिया। जिससे उन्हें रहेजा बिल्डर व डीडीए के अत्याचारों से छुटकारा मिल जाए और साथ ही कठपुतली कॉलोनी की पूरी जमीन पर वहां बसे 4000 के करीब सभी परिवारों को एक साथ कठपुतली कॉलोनी में ही उनके रोजगार के प्रबंध के साथ घर मिल सके। कॉलोनी के लोगों ने इसके साथ रहेजा बिल्डर के 16 मंजिला बिल्डिंग में ठूसे जाने वाले प्लान को भी अपने साथ धोखा करार देते हुए इसका जमकर विरोध किया। इन सभी बातों को सुनते हुए माननीय मुख्य न्यायाधीश ने पुनर्वास के मुद्दे को महत्व देते हुए इसके लिए अलग से याचिका दाखिल करने का सुझाव दिया।
 
हाई कोर्ट ने आखिरी सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से तीन सदस्यी टीम का गठन किया था और वहां मौजूद घरों व उसमें रह रहे परिवारों का सर्वे कर बताने का आदेश दिया था, जिसके उत्तर में आज तीन सदस्यी टीम की ओर से हिमशी सिंह ने रिपोर्ट दाखिल की और वहां 52 मौजूद बिल्डिंग में रह रहे 107 परिवारों का विवरण दिया। जिसमें कई पात्र व अपात्र परिवार अभी भी निवासरत हैं। इसपर डीडीए ने उन घरों की तसवीरें दिखाकर यह साबित करने की कोशिश की वह सभी घर रहने लायक नहीं है। इसका सिर्फ और सिर्फ डीडीए और बिल्डर की सांठ-गाँठ जिम्मेदार है जिसके कारण कई घर आधे टूट गए, बिजली-पानी का कनेक्शन काट दिया गया और पूरे क्षेत्र में पानी भर गया है। इसके बावजूद लोग अपने घरों में रहते आ रहे हैं। कॉलोनी की तस्वीरों से साफ़ साबित होता है कि तोड़ते वक्त डीडीए ने एक बार भी अपात्र परिवारों के बेघर हो जाने का ख्याल नहीं रखा और 771 परिवार, जो लगभग 4000 लोग है, के रहने का कोई इन्तेजाम किये बिना एक झटके में तोड़ दिया और कोर्ट के आदेश आने के बाद भी तोडना जारी रखते हुए, अब कुछ घर कॉलोनी के सिर्फ एक कोने में बच गए हैं।
 
आज हाई कोर्ट में डीडीए ने तीन सदस्यी टीम पर लोगों के पक्ष में बात रखने पर एकतरफा होने का आरोप लगाया और इनकी जांच को पूरी तरह से मानने से बार-बार इनकार किया। आजतक डीडीए द्वारा लगाये सभी आरोप और दलीलें ज्यादातर मौखिक रहे हैं और कभी भी कोई साक्ष्य दूसरे पक्ष या कोर्ट में सभी के सामने प्रस्तुत नहीं किया है। आज भी पहले की तरह कॉलोनी के हित में लड़ रहे वकील के बार-बार साक्ष्य मांगने पर भी डीडीए एक भी दलील को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं दे पाया। इन सभी बातों को देखते हुए माननीय उच्च न्यायाधीश ने एक स्वतंत्र दो सदस्यी टीम का गठन किया और इनको कठपुतली कॉलोनी के साथ-साथ ट्रांजिट कैंप व नरेला की नागरिक सुविधायें व लोगों की समस्याओं पर भी विस्तृत रिपोर्ट बनाने का आदेश दिया।
 
एक तरफ कड़ी ठंड में, बिना पूरी कठपुतली कॉलोनी को सूचित किये लोगों के घर तोड़े गए। इस बर्बरता के बाद 3-4 मौत भी हुई, एक 25 साल के लड़के को मंदिर में सोते हुए ही, मंदिर तोड़ते हुए, मलबे में दबा कर उसको मारने की कोशिश की, कई छोटे नवजात शिशुओं को निमोनिया जैसी बीमारियों का शिकार होना पड़ रहा है, तो कई गर्भवती महिलाओं को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ, ट्रांजिट कैंप में 2800 इकाई पूरी होने पर वहाँ और जगह ना होने व नागरिक सुविधाओं का घोर अभाव होने के कारण, जब कॉलोनी के कुछ परिवारों ने फ्लाईओवर के नीचे, नगर निगम स्कूल के मैदान में, रेलवे पटरी के पास तो कई खुले आसमान में रहना मुनासिब समझा तो उन्हें बार-बार डीडीए व बिल्डर के गुंडों के आतंक का सामना कर पड़ा। उनकी मदद में जब दिल्ली सरकार और दिल्ली महिला आयोग ने खुद टेंट, पानी, मोबाइल शौचालय जैसी मदद करते हुए दिल्ली के नागरिकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी करने की कोशिश की तो उन्हें भी डी.डी.ए ने ऐसा नहीं करने दिया और आस-पास टेंट नहीं लगने दिए, शौचालय की बिजली काट दी, और पानी के टैंकर को कई बार वापस भिजवाया।
 
इन सभी परेशानियों और चुनौतियों के बावजूद कठपुतली कॉलोनी के लोग ट्रांजिट कैंप व नरेला से आकर भी कठपुतली कॉलोनी में अभी भी संघर्षरत लोगों के साथ अपनी लड़ाई जारी रख रहे हैं और रहेजा को कठपुतली कॉलोनी से हटाकर सभी परिवारों के लिए आवास सुनिश्चित करता हुआ प्लान पर सहमति जता रहे हैं। लड़ाई कठिन दौर में हैं, लेकिन उसी मजबूती के साथ जारी है और न्याय की अपेक्षा में जारी रहेगी।
 
 
 
कठपुतली कॉलोनी के संघर्षशील निवासी, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, व बस्ती बचाओ संघर्ष समिति
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें 9867348307, 9582229754

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