प्रिय Sagar Media Inc,

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रेणु के अनुसार मुंबई के सेंट जॉर्जस अस्पताल के मुर्दाघर में लाशों को सीमेंट की बोरियों की तरह; एक के ऊपर एक रखा जाता है।

वो लिखती हैं, “मैंने कुछ मीडिया रिपोर्टस भी पढ़ीं, जिससे पता चला कि कई सालों से अस्पताल में एक चपरासी पोस्टमॉर्टम करता है, जिसके पास कोई मेडिकल ट्रेनिंग भी नहीं है।”

रेणु की पेटीशन पर हस्ताक्षर करें ताकि सेंट जॉर्जस अस्पताल के मुर्दाघर और पोस्टमॉर्टम सेंटर, दोनों की मरम्मत हो और वहां भेजी जाने वाली लाशों के साथ दुर्व्यवहार ना हो।

निर्णायक : स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय: मुर्दाघरों में लाशों को सीमेंट की बोरियों की तरह रखना बंद करो! #DignityInDeath
मुद्दा उठाने वाले : Renu Kapoor
Mumbai, India
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मुंबई में एक ऐसी जगह है जहां लाशों को सीमेंट की बोरियों की तरह; एक के ऊपर एक रखा जाता है, मानो मौत के बाद इंसान के शरीर का कोई सम्मान ही नहीं है। मैंने उस कमरे को देखा है, जहां लाशों को निर्ममता से रखा जाता है। ये कमरा, जिसमें रोशनी के नाम पर एक दम तोड़ता बल्ब है, इसकी छत से पानी टपकता है और इस कमरे में कोई खिड़की भी नहीं है।

ये कमरा मुंबई के सेंट जॉर्जस अस्पताल का मुर्दाघर है। इस मुर्दाघर को देखकर आप यकीन नहीं करेंगे कि ये मुंबई शहर में बसा है। मैंने अपनी आंखों से इसकी हालत देखी है जब पिछले साल अप्रैल में मेरे ड्राइवर मनोज ने सेंट जॉर्जस अस्पताल में अपनी आखिरी सांस ली।

मनोज को सेप्टिसीमिया की बिमारी की वजह से सेंट जॉर्जस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 24 घंटे के अंदर उनकी मौत हो गई थी। मनोज बेहद ईमानदार और मेहनती थे, उनकी दो बेटियां थीं जिन्हें छोड़कर वो इस दुनिया से चले गए। एक ईमानदार व्यक्ति और एक पिता की लाश के साथ ऐसा व्यवहार देखकर मेरा कलेजा मुंह को आ गया।

मैंने ये याचिका दायर की है ताकि सेंट जॉर्जस अस्पताल के मुर्दाघर और पोस्टमॉर्टम सेंटर, दोनों की मरम्मत हो और वहां भेजी जाने वाली लाशों के साथ दुर्व्यवहार ना हो।

फिलहाल ये मुर्दाघर, धोबीघाट से सटे अस्पताल के पीछे बने स्टाफ क्वार्टर्स के पास है. ये एक जर्जर इमारत है, जिसकी छत भी टूटी हुई है। पोस्टमॉर्टम वाले कमरे में दो मार्बल के प्लेटफॉर्म हैं, जिनपर लाशों को रखा जाता है, इसी कमरे में पोस्टमॉर्टम से जुड़े प्रशासनिक काम भी होते हैं।

मुर्दाघर की ये अकेली समस्या नहीं है बल्कि वहां प्रशिक्षित स्टाफ की भी कमी है। बताया जाता है कि कई बार अप्रशिक्षित स्टाफ से ही पोस्टमार्टम कराया जाता है। मनोज की बॉडी लेते समय मैंने वहां एक व्यक्ति को देखा, जिसके हाथ में एक औजार था और जो लुंगी पहने हुए था।

मैंने कुछ मीडिया रिपोर्टस भी पढ़ीं, जिससे पता चला कि कई सालों से अस्पताल में एक चपरासी पोस्टमॉर्टम करता है, जिसके पास कोई मेडिकल ट्रेनिंग नहीं है।

सेंट जॉर्जस एक सरकारी अस्पताल है, जहां समाज का वो वर्ग आता है जिसके पास महंगे प्राइवेट अस्पताल में जाने के पैसे नहीं होते हैं। सेंट जॉर्जस और उसके जैसे सरकारी अस्पताल ही गरीब जनता का सहारा होते हैं।

2016 की एक रिपोर्ट कहती है, “सेंट जॉर्जस अस्पताल के जर्जर पोस्टमॉर्टम सेंटर का होगा रिडेवलपमेंट। अस्पताल प्रशासन ने अस्पताल के पीछे नई बिल्डिंग को दी मंज़ूरी।” इस रिपोर्ट को दो साल होने को आए हैं पर नया पोस्टमार्टम सेंटर एक सपना ही बनकर रह गया है।

मैं इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए जद्दोजहद कर रही हूं। मेरा साथ दीजिए ताकि मैं हर मुंबईकर को मौत के बाद भी सम्मान दिला सकूं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से मेरी मांग है कि वो सेंट जॉर्जस अस्पताल के मुर्दाघर और पोस्टमाॉर्टम सेंटर की तुरंत मरम्मत कराएं।

आप भी मेरी आवाज़ में अपनी आवाज़ मिलाएं और इस याचिका पर साइन कर के इसे अन्य लोगों तक पहुंचाएं। #DignityInDeath

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